Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.134.2: धर्म और अधर्म का प्रश्न उठाकर अपने कर्तव्य में बाधा नहीं डालनी चाहिए; क्योंकि धर्म का फल दिखाई नहीं देता। जैसे भेड़िये के पदचिह्न का निर्णय करना कठिन है कि वह बाघ का है या कुत्ते का, वैसे ही धर्म और अधर्म का निर्णय करना भी कठिन है।॥2॥ | mahabharat अध्याय 12.134: बलकी महत्ता और पापसे छूटनेका प्रायश्चित्त । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्र न व्यवधातव्यं परोक्षा धर्मयापना।
अधर्मो धर्म इत्येतद् यथा वृकपदं तथा॥ २॥
अनुवाद
धर्म और अधर्म का प्रश्न उठाकर अपने कर्तव्य में बाधा नहीं डालनी चाहिए; क्योंकि धर्म का फल दिखाई नहीं देता। जैसे भेड़िये के पदचिह्न का निर्णय करना कठिन है कि वह बाघ का है या कुत्ते का, वैसे ही धर्म और अधर्म का निर्णय करना भी कठिन है।॥2॥
One should not interfere with one's duty by raising the issue of Dharma and Adharma; because the result of Dharma is not visible. Just as one cannot decide whether the footprint of a wolf is that of a tiger or a dog, similarly it is difficult to decide about Dharma and Adharma.॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥