श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 134: बलकी महत्ता और पापसे छूटनेका प्रायश्चित्त  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.134.11 
यदेवमाहु: पापेन चारित्रेण विवर्जित:।
सुभृशं तप्यते तेन वाक्शल्येन परिक्षत:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
लोग दुर्बल मनुष्य के विषय में इस प्रकार कहने लगते हैं - ‘अहा! इसके पापपूर्ण आचरण के कारण इसके बन्धु-बान्धवों ने इसे त्याग दिया है।’ उनकी बातों से आहत होकर वह अत्यन्त व्यथित हो जाता है ॥11॥
 
People start saying about a weak man like this - 'Oh! Due to his sinful conduct, he has been abandoned by his relatives.' Wounded by their words, he becomes very distressed. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)