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mahabharat 12.133.7: लक्ष्मी के कारण ही राजा को सर्वत्र बड़ा आदर और सम्मान मिलता है। जिस प्रकार वस्त्र स्त्री के गुप्त अंगों को छिपा देता है, उसी प्रकार लक्ष्मी राजा के समस्त दोषों को ढक लेती हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.133: राजाके लिये कोशसंग्रहकी आवश्यकता, मर्यादाकी स्थापना और अमर्यादित दस्युवृत्तिकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.133.7 
श्रियो हि कारणाद् राजा सत्क्रियां लभते पराम्।
सास्य गूहति पापानि वासो गुह्यमिव स्त्रिया:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मी के कारण ही राजा को सर्वत्र बड़ा आदर और सम्मान मिलता है। जिस प्रकार वस्त्र स्त्री के गुप्त अंगों को छिपा देता है, उसी प्रकार लक्ष्मी राजा के समस्त दोषों को ढक लेती हैं।
 
It is because of Lakshmi that the king gets great respect and honour everywhere. Just as a cloth hides the private parts of a woman, in the same way Lakshmi covers all the faults of the king. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)