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mahabharat 12.133.6: जिसके पास धन का भण्डार नहीं है, उस राजा की साधारण प्रजा भी उपेक्षा करती है। लोग उससे थोड़ा-सा लेकर संतुष्ट नहीं होते और न ही उसका काम करने में उत्साह दिखाते हैं। ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.133: राजाके लिये कोशसंग्रहकी आवश्यकता, मर्यादाकी स्थापना और अमर्यादित दस्युवृत्तिकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 133: राजाके लिये कोशसंग्रहकी आवश्यकता, मर्यादाकी स्थापना और अमर्यादित दस्युवृत्तिकी निन्दा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.133.6 
हीनकोशं हि राजानमवजानन्ति मानवा:।
न चास्याल्पेन तुष्यन्ति कार्यमप्युत्सहन्ति च॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जिसके पास धन का भण्डार नहीं है, उस राजा की साधारण प्रजा भी उपेक्षा करती है। लोग उससे थोड़ा-सा लेकर संतुष्ट नहीं होते और न ही उसका काम करने में उत्साह दिखाते हैं। ॥6॥
 
Even ordinary people ignore a king who does not have a store of wealth. People are not satisfied with taking a little from him and neither do they show enthusiasm in doing his work. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)