Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.133.3: जो मनुष्य शुद्ध आचरण और विचारों से जीवन व्यतीत करता है, वह कभी धन संचय नहीं कर सकता। जो अत्यन्त क्रूर है, वह भी इसमें कभी सफल नहीं हो सकता; इसलिए मध्यम मार्ग का आश्रय लेकर धन संचय करना चाहिए॥3॥ | mahabharat अध्याय 12.133: राजाके लिये कोशसंग्रहकी आवश्यकता, मर्यादाकी स्थापना और अमर्यादित दस्युवृत्तिकी निन्दा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न कोश: शुद्धशौचेन न नृशंसेन जातुचित्।
मध्यमं पदमास्थाय कोशसंग्रहणं चरेत्॥ ३॥
अनुवाद
जो मनुष्य शुद्ध आचरण और विचारों से जीवन व्यतीत करता है, वह कभी धन संचय नहीं कर सकता। जो अत्यन्त क्रूर है, वह भी इसमें कभी सफल नहीं हो सकता; इसलिए मध्यम मार्ग का आश्रय लेकर धन संचय करना चाहिए॥3॥
One who lives by pure conduct and thoughts can never accumulate wealth. One who is extremely cruel can also never succeed in this; therefore one should accumulate wealth by taking recourse to the middle path.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥