Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.133.20: जो लुटेरे दूसरों का धन छोड़कर जाते हैं, वे अपने धन के अवशेष सर्वत्र देखते हैं; और जो दूसरों के धन में से कुछ भी नहीं छोड़ते, उन्हें अपने धन के नष्ट हो जाने का भय सदैव बना रहता है ॥ 20॥ | mahabharat अध्याय 12.133: राजाके लिये कोशसंग्रहकी आवश्यकता, मर्यादाकी स्थापना और अमर्यादित दस्युवृत्तिकी निन्दा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स शेषकारिणस्तत्र शेषं पश्यन्ति सर्वश:।
नि:शेषकारिणो नित्यं नि:शेषकरणाद् भयम्॥ २०॥
अनुवाद
जो लुटेरे दूसरों का धन छोड़कर जाते हैं, वे अपने धन के अवशेष सर्वत्र देखते हैं; और जो दूसरों के धन में से कुछ भी नहीं छोड़ते, उन्हें अपने धन के नष्ट हो जाने का भय सदैव बना रहता है ॥ 20॥
Those robbers who leave behind the wealth of others, they see remnants of their wealth everywhere; and those who do not leave behind anything from the wealth of others, they always have the fear of their wealth getting exhausted. ॥ 20॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि त्रयस्त्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें एक सौ तैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥