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mahabharat 12.133.19: अतः डाकुओं को उचित है कि वे दूसरों का कुछ धन अपने पास ही रहने दें, उसे पूरी तरह न लूटें। उन्हें यह सोचकर क्रूरता नहीं करनी चाहिए कि 'मैं शक्तिशाली हूँ'।॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.133: राजाके लिये कोशसंग्रहकी आवश्यकता, मर्यादाकी स्थापना और अमर्यादित दस्युवृत्तिकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.133.19 
तस्मात् सशेषं कर्तव्यं स्वाधीनमपि दस्युभि:।
न बलस्थोऽहमस्मीति नृशंसानि समाचरेत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
अतः डाकुओं को उचित है कि वे दूसरों का कुछ धन अपने पास ही रहने दें, उसे पूरी तरह न लूटें। उन्हें यह सोचकर क्रूरता नहीं करनी चाहिए कि 'मैं शक्तिशाली हूँ'।॥19॥
 
Therefore, it is appropriate for bandits to leave some of the wealth of others in their possession and not rob it completely. They should not behave cruelly thinking that 'I am powerful'.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)