Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.133.14: इस संसार में ऐसे लोग भी हैं जो यह मानते हैं कि यह लोक और परलोक दोनों ही नहीं हैं। ऐसे नास्तिक भय और संदेह का कारण होते हैं और उन पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए ॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.133: राजाके लिये कोशसंग्रहकी आवश्यकता, मर्यादाकी स्थापना और अमर्यादित दस्युवृत्तिकी निन्दा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नायं लोकोऽस्ति न पर इति व्यवसितो जन:।
नालं गन्तुं हि विश्वासं नास्तिके भयशङ्किते॥ १४॥
अनुवाद
इस संसार में ऐसे लोग भी हैं जो यह मानते हैं कि यह लोक और परलोक दोनों ही नहीं हैं। ऐसे नास्तिक भय और संदेह का कारण होते हैं और उन पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए ॥14॥
There are people in this world who are convinced that this world and the next world do not exist. Such an atheist is a source of fear and doubt and should never be trusted. ॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥