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mahabharat 12.133.10-11h: वह जंगल में शरण लेकर हिरणों के साथ घूम सकता है, लेकिन उसे नियम तोड़ने वाले लुटेरों के साथ कभी नहीं रहना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.133: राजाके लिये कोशसंग्रहकी आवश्यकता, मर्यादाकी स्थापना और अमर्यादित दस्युवृत्तिकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.133.10-11h 
अप्यरण्यं समाश्रित्य चरेन्मृगगणै: सह॥ १०॥
न त्वेवोज्झितमर्यादैर्दस्युभि: सहितश्चरेत्।
 
 
अनुवाद
वह जंगल में शरण लेकर हिरणों के साथ घूम सकता है, लेकिन उसे नियम तोड़ने वाले लुटेरों के साथ कभी नहीं रहना चाहिए।
 
He may take refuge in the forest and roam with the deer, but he should never stay with the robbers who violate the rules. 10 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)