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mahabharat 12.133.1: भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! राजा को अपने राज्य से तथा शत्रुओं के राज्य से भी धन लेकर अपना कोष भरना चाहिए। कोष से धर्म की वृद्धि होती है और राज्य की जड़ें बढ़ती हैं अर्थात् मजबूत होती हैं॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.133: राजाके लिये कोशसंग्रहकी आवश्यकता, मर्यादाकी स्थापना और अमर्यादित दस्युवृत्तिकी निन्दा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.133.1 
भीष्म उवाच
स्वराष्ट्रात् परराष्ट्राच्च कोशं संजनयेन्नृप:।
कोशाद्धि धर्म: कौन्तेय राज्यमूलं च वर्धते॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! राजा को अपने राज्य से तथा शत्रुओं के राज्य से भी धन लेकर अपना कोष भरना चाहिए। कोष से धर्म की वृद्धि होती है और राज्य की जड़ें बढ़ती हैं अर्थात् मजबूत होती हैं॥1॥
 
Bhishmaji says-Yudhishthira! The king should fill his treasury by taking money from his own kingdom as well as that of his enemies. Dharma increases from the treasury and the roots of the kingdom grow i.e. become strong.॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)