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mahabharat 12.132.7: युधिष्ठिर! जो लोग बल और पराक्रम से जीविका चलाते हैं, उन्हें अन्य कर्म प्रिय नहीं लगते। बलवान पुरुष बल के कारण ही कर्म में प्रवृत्त होते हैं। 7॥   |   mahabharat अध्याय 12.132: ब्राह्मणों और श्रेष्ठ राजाओंके धर्मका वर्णन तथा धर्मकी गतिको सूक्ष्म बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.132.7 
येषां बलकृता वृत्तिस्तेषामन्या न रोचते।
तेजसाभिप्रवर्तन्ते बलवन्तो युधिष्ठिर॥ ७॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जो लोग बल और पराक्रम से जीविका चलाते हैं, उन्हें अन्य कर्म प्रिय नहीं लगते। बलवान पुरुष बल के कारण ही कर्म में प्रवृत्त होते हैं। 7॥
 
Yudhisthira! Those who earn their living through strength and bravery do not like other activities. Strong men engage in action only because of their strength. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)