श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 132: ब्राह्मणों और श्रेष्ठ राजाओंके धर्मका वर्णन तथा धर्मकी गतिको सूक्ष्म बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.132.17 
आर्षमप्यत्र पश्यन्ति विकर्मस्थस्य पातनम्।
न तादृक् सदृशं किञ्चित् प्रमाणं दृश्यते क्वचित् ॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब शास्त्रविरुद्ध कर्म करने वालों को दण्ड देने की बात आती है, तब वे आर्ष प्रमाण को भी देखते हैं। ऋषियों के वचनों के समान दूसरा प्रमाण कहीं नहीं दिखाई देता ॥17॥
 
When it comes to punishing those who commit acts contrary to the scriptures, they also look at the evidence of Aarsha. No other evidence like the words of the sages is seen anywhere. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)