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mahabharat 12.132.15: राजा को ऐसा आचरण अपनाना चाहिए जिससे अन्य लोगों का कल्याण हो। धर्म को जानने वाला व्यक्ति आचरण को ही धर्म का मुख्य लक्षण मानता है।॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.132: ब्राह्मणों और श्रेष्ठ राजाओंके धर्मका वर्णन तथा धर्मकी गतिको सूक्ष्म बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.132.15 
यथा यथास्य बहव: सहाया: स्युस्तथा परे।
आचारमेव मन्यन्ते गरीयो धर्मलक्षणम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
राजा को ऐसा आचरण अपनाना चाहिए जिससे अन्य लोगों का कल्याण हो। धर्म को जानने वाला व्यक्ति आचरण को ही धर्म का मुख्य लक्षण मानता है।॥15॥
 
The king should adopt such conduct that helps many other people. A person having knowledge of Dharma considers conduct to be the main characteristic of Dharma.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)