Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.131.9: युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! यदि शत्रु बाहर से उसके देश और किले पर आक्रमण करके उसे कष्ट दे रहे हों तथा उसके मंत्री भी भीतर से क्रोधित हों, खजाना खाली हो तथा राजा के भेद सबके कानों तक पहुँच गए हों, तो उसे क्या करना चाहिए?" | mahabharat अध्याय 12.131: आपत्तिग्रस्त राजाके कर्तव्यका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! यदि शत्रु बाहर से उसके देश और किले पर आक्रमण करके उसे कष्ट दे रहे हों तथा उसके मंत्री भी भीतर से क्रोधित हों, खजाना खाली हो तथा राजा के भेद सबके कानों तक पहुँच गए हों, तो उसे क्या करना चाहिए?"
Yudhishthira asked, "Grandfather! If the enemies are troubling him by attacking his country and fort from outside and his ministers are also angry from inside, the treasury is empty and the secrets of the king have reached everyone's ears, then what should he do?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥