श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 131: आपत्तिग्रस्त राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.131.9 
युधिष्ठिर उवाच
आभ्यन्तरे प्रकुपिते बाह्ये चोपनिपीडिते।
क्षीणे कोशे श्रुते मन्त्रे किं कार्यमवशिष्यते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! यदि शत्रु बाहर से उसके देश और किले पर आक्रमण करके उसे कष्ट दे रहे हों तथा उसके मंत्री भी भीतर से क्रोधित हों, खजाना खाली हो तथा राजा के भेद सबके कानों तक पहुँच गए हों, तो उसे क्या करना चाहिए?"
 
Yudhishthira asked, "Grandfather! If the enemies are troubling him by attacking his country and fort from outside and his ministers are also angry from inside, the treasury is empty and the secrets of the king have reached everyone's ears, then what should he do?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)