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mahabharat 12.131.7: जहाँ धन और सेना का त्याग करने से ही विपत्तियों का निवारण हो सकता है, वहाँ अर्थशास्त्र और धर्म का ज्ञान रखने वाला कौन मनुष्य अपनी सबसे मूल्यवान वस्तु, शरीर का त्याग करेगा? ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.131: आपत्तिग्रस्त राजाके कर्तव्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 131: आपत्तिग्रस्त राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.131.7 
यास्तु कोशबलत्यागाच्छक्यास्तरितुमापद:।
कस्तत्राधिकमात्मानं संत्यजेदर्थधर्मवित्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जहाँ धन और सेना का त्याग करने से ही विपत्तियों का निवारण हो सकता है, वहाँ अर्थशास्त्र और धर्म का ज्ञान रखने वाला कौन मनुष्य अपनी सबसे मूल्यवान वस्तु, शरीर का त्याग करेगा? ॥7॥
 
In a situation where adversities can be overcome only by giving up one's treasury and army, which man having knowledge of economics and religion would give up his most valuable possession, the body? ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)