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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 131: आपत्तिग्रस्त राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.131.6 
अपास्य राजधानीं वा तरेद् द्रव्येण चापदम्।
तद्भावयुक्तो द्रव्याणि जीवन् पुनरुपार्जयेत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
या यदि आवश्यक हो तो वह अपनी राजधानी छोड़कर विपत्ति से निपटने के लिए बहुत सारा धन दान कर सकता है। यदि वह जीवित बच जाता है, तो यदि वह राजा के योग्य गुणों से संपन्न है, तो वह पुनः धन अर्जित कर सकता है।
 
Or if necessary he may leave his capital and give away a lot of money to overcome the calamity. If he survives, he can again earn wealth if he is endowed with the qualities befitting a king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)