Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.131.5: यदि कोई शत्रु जो विजय की इच्छा रखता है, अधर्मी और बलवान है, किन्तु पापमय विचारों वाला है, तो उसके साथ संधि करने की इच्छा करनी चाहिए, चाहे इसके लिए कुछ खोना ही क्यों न पड़े ॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.131: आपत्तिग्रस्त राजाके कर्तव्यका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि कोई शत्रु जो विजय की इच्छा रखता है, अधर्मी और बलवान है, किन्तु पापमय विचारों वाला है, तो उसके साथ संधि करने की इच्छा करनी चाहिए, चाहे इसके लिए कुछ खोना ही क्यों न पड़े ॥5॥
If an enemy who desires to be victorious is unrighteous and strong but has sinful thoughts, one should wish to make a treaty with him even if one has to lose something. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥