Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.131.14: अथवा विरोधी पक्ष के मंत्रियों को मधुर वचनों से प्रसन्न करके किले से निकल भागने का प्रयत्न करना चाहिए। तत्पश्चात् कुछ समय व्यतीत करके, श्रेष्ठ पुरुषों की सलाह लेकर अपने खोए हुए धन या राज्य को पुनः प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए।॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.131: आपत्तिग्रस्त राजाके कर्तव्यका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपचिक्रमिषु: क्षिप्रं साम्ना वा परिसान्त्वयन्।
विलङ्घयित्वा मन्त्रेण तत: स्वयमुपक्रमेत्॥ १४॥
अनुवाद
अथवा विरोधी पक्ष के मंत्रियों को मधुर वचनों से प्रसन्न करके किले से निकल भागने का प्रयत्न करना चाहिए। तत्पश्चात् कुछ समय व्यतीत करके, श्रेष्ठ पुरुषों की सलाह लेकर अपने खोए हुए धन या राज्य को पुनः प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए।॥14॥
Or he should try to escape from the fort by pleasing the ministers of the opposing party with sweet words. Thereafter, after spending some time, he should take the advice of noble men and start trying to regain his lost wealth or kingdom.॥ 14॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि एकत्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें एक सौ इकतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥