vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 131: आपत्तिग्रस्त राजाके कर्तव्यका वर्णन
»
श्लोक 11
श्लोक
12.131.11
अनुरक्तेन चेष्टेन हृष्टेन जगतीपति:।
अल्पेनापि हि सैन्येन महीं जयति भूमिप:॥ ११॥
अनुवाद
यदि सेना प्रेममयी, स्वामी को प्रिय और स्वस्थ हो, तो उस छोटी सी सेना से भी राजा पृथ्वी पर विजय प्राप्त कर सकता है ॥11॥
If the army is loving, dear to the lord and is healthy, then with that small army also the king can conquer the earth. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×