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mahabharat 12.131.10: भीष्म बोले, 'हे राजन! ऐसी स्थिति में राजा को या तो तुरन्त संधि करने का विचार करना चाहिए, अथवा शीघ्र ही अपना पराक्रम दिखाकर शत्रु को राज्य से बाहर निकाल देना चाहिए। यदि संयोगवश ऐसा करते हुए उसकी मृत्यु हो जाए, तो परलोक में शुभ होगा।'   |   mahabharat अध्याय 12.131: आपत्तिग्रस्त राजाके कर्तव्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 131: आपत्तिग्रस्त राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.131.10 
भीष्म उवाच
क्षिप्रं वा संधिकाम: स्यात् क्षिप्रं वा तीक्ष्णविक्रम:।
तदापनयनं क्षिप्रमेतावत् साम्परायिकम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, 'हे राजन! ऐसी स्थिति में राजा को या तो तुरन्त संधि करने का विचार करना चाहिए, अथवा शीघ्र ही अपना पराक्रम दिखाकर शत्रु को राज्य से बाहर निकाल देना चाहिए। यदि संयोगवश ऐसा करते हुए उसकी मृत्यु हो जाए, तो परलोक में शुभ होगा।'
 
Bhishma said, 'O King! In such a situation the king should either think of a treaty immediately or he should display his valour as quickly as possible and drive the enemy out of the kingdom. If by chance he dies while doing so, it will be auspicious in the next world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)