Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.130.45: हे राजन! हे पृथ्वी के स्वामी! धन का संचय और उसका त्याग - ये दोनों एक ही व्यक्ति में किसी भी प्रकार से एक साथ नहीं रह सकते; क्योंकि मैं वन में रहने वाले त्यागी महात्माओं को धन में श्रेष्ठ नहीं देखता। | mahabharat अध्याय 12.130: आपत्तिके समय राजाका धर्म । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन! हे पृथ्वी के स्वामी! धन का संचय और उसका त्याग - ये दोनों एक ही व्यक्ति में किसी भी प्रकार से एक साथ नहीं रह सकते; क्योंकि मैं वन में रहने वाले त्यागी महात्माओं को धन में श्रेष्ठ नहीं देखता।
O King! O lord of the earth! Accumulation of wealth and renunciation of it - both cannot co-exist in one person in any way; for I do not see the renunciant saints living in the forest being superior in wealth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥