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mahabharat 12.130.39: जैसे यज्ञ की सफलता के लिए अन्य सभी सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, उत्तम यज्ञ किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जाता है, वैसे ही यज्ञ से संबंधित अन्य सभी वस्तुएं भी किसी विशेष उद्देश्य की सफलता के लिए उपयोग की जाती हैं और ये सभी यज्ञ करने के साधन मात्र हैं ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 12.130: आपत्तिके समय राजाका धर्म   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 130: आपत्तिके समय राजाका धर्म  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.130.39 
यज्ञार्थमन्यद् भवति यज्ञोऽन्यार्थस्तथा पर:।
यज्ञस्यार्थार्थमेवान्यत् तत् सर्वं यज्ञसाधनम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जैसे यज्ञ की सफलता के लिए अन्य सभी सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, उत्तम यज्ञ किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जाता है, वैसे ही यज्ञ से संबंधित अन्य सभी वस्तुएं भी किसी विशेष उद्देश्य की सफलता के लिए उपयोग की जाती हैं और ये सभी यज्ञ करने के साधन मात्र हैं ॥39॥
 
Just as all other materials are used for the success of a yajna, the best yajna is performed for some other purpose, all other things related to yajna are also used for the success of some particular purpose and all these are only the means of performing the yajna. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)