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mahabharat 12.130.35: राजा का मूल उसकी सेना और कोष है। इनमें से भी सेना का मूल कोष है। सेना ही समस्त धर्मों की रक्षा का मूल है और धर्म ही प्रजा का मूल है॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 12.130: आपत्तिके समय राजाका धर्म   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 130: आपत्तिके समय राजाका धर्म  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.130.35 
राज्ञ: कोशबलं मूलं कोशमूलं पुनर्बलम्।
तन्मूलं सर्वधर्माणां धर्ममूला: पुन: प्रजा:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
राजा का मूल उसकी सेना और कोष है। इनमें से भी सेना का मूल कोष है। सेना ही समस्त धर्मों की रक्षा का मूल है और धर्म ही प्रजा का मूल है॥ 35॥
 
The roots of a king are his army and treasury. Among these, the roots of his army are treasury. The army is the root of the protection of all religions and religion is the root of the subjects.॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)