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mahabharat 12.130.32: राजा चाहे भूख से पीड़ित हो अथवा जीविका चलाने में कठिनाई महसूस कर रहा हो, तो भी उसे अपने राज्य से कोष, राजकर्मचारी, सेना, मित्र तथा अन्य संचित साधन कभी नहीं निकालने चाहिए ॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 12.130: आपत्तिके समय राजाका धर्म   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 130: आपत्तिके समय राजाका धर्म  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.130.32 
कोशं दण्डं बलं मित्रं यदन्यदपि संचितम्।
न कुर्वीतान्तरं राष्ट्रे राजा परिगत: क्षुधा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
राजा चाहे भूख से पीड़ित हो अथवा जीविका चलाने में कठिनाई महसूस कर रहा हो, तो भी उसे अपने राज्य से कोष, राजकर्मचारी, सेना, मित्र तथा अन्य संचित साधन कभी नहीं निकालने चाहिए ॥ 32॥
 
Even if the king is suffering from hunger or has difficulty in earning his livelihood, he should never remove the treasury, royal staff, army, friends and other accumulated resources from his kingdom. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)