Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.130.29: हे कुरुश्रेष्ठ! केवल अपने माथे पर लिखे वेतन पर निर्भर रहकर कोई जीवित नहीं रह सकता; अतः जो राजा अपनी प्रजा की रक्षा करना चाहता है, उसके लिए भाग्य पर निर्भर रहकर जीवित रहना सर्वथा असम्भव है। | mahabharat अध्याय 12.130: आपत्तिके समय राजाका धर्म । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न शंखलिखितां वृत्तिं शक्यमास्थाय जीवितुम्।
विशेषत: कुरुश्रेष्ठ प्रजापालनमीप्सया॥ २९॥
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! केवल अपने माथे पर लिखे वेतन पर निर्भर रहकर कोई जीवित नहीं रह सकता; अतः जो राजा अपनी प्रजा की रक्षा करना चाहता है, उसके लिए भाग्य पर निर्भर रहकर जीवित रहना सर्वथा असम्भव है।
O best of the Kurus! No one can survive by relying only on the salary written on his forehead; hence it is absolutely impossible for a king who wishes to protect his subjects to survive by relying on fate.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥