Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.130.26: फिर क्षत्रिय के विषय में संशय कैसे हो सकता है? उसके लिए यह सदैव निश्चित है कि संकट के समय उसे विशिष्ट जनों से अर्थात् धनवानों से बलपूर्वक धन लेना ही होगा। धन के अभाव में उसे किसी प्रकार का कष्ट नहीं उठाना होगा॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 12.130: आपत्तिके समय राजाका धर्म । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फिर क्षत्रिय के विषय में संशय कैसे हो सकता है? उसके लिए यह सदैव निश्चित है कि संकट के समय उसे विशिष्ट जनों से अर्थात् धनवानों से बलपूर्वक धन लेना ही होगा। धन के अभाव में उसे किसी प्रकार का कष्ट नहीं उठाना होगा॥ 26॥
Then how can there be any doubt about a Kshatriya? It is always certain for him that in times of crisis he must forcibly take money from the special people i.e. the rich people. He must not suffer in any way due to lack of money.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥