सहदेव उवाच
न बाह्यं द्रव्यमुत्सृज्य सिद्धिर्भवति भारत।
शारीरं द्रव्यमुत्सृज्य सिद्धिर्भवति वा न वा॥ १॥
अनुवाद
सहदेव बोले - भरतनन्दन! केवल बाह्य द्रव्य त्यागने से सिद्धि प्राप्त नहीं होती, देह द्रव्य त्यागने से भी सिद्धि प्राप्त होती है या नहीं; इसमें संदेह है ॥1॥
Sahadev said – Bharatnandan! Siddhi is not achieved by merely renouncing external material, whether one attains Siddhi by renouncing bodily material also or not; There is doubt in this. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥