श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 129: यम और गौतमका संवाद  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.129.9 
गौतम उवाच
मातापितृभ्यामानृण्यं किं कृत्वा समवाप्नुयात्।
कथं च लोकानाप्नोति पुरुषो दुर्लभान् शुचीन्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तब गौतम बोले - हे प्रभु ! मनुष्य किस कर्म से माता-पिता का ऋणमुक्त हो सकता है ? तथा उसे दुर्लभ एवं पवित्र लोकों की प्राप्ति कैसे होती है ?
 
Then Gautam said – Lord! By what action can a person become indebted to his parents? And how does he attain rare and sacred worlds? 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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