श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 129: यम और गौतमका संवाद  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.129.11 
अश्वमेधैश्च यष्टव्यं बहुभि: स्वाप्तदक्षिणै:।
तेन लोकानवाप्नोति पुरुषोऽद्भुतदर्शनान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
राजा को भी पर्याप्त दक्षिणा सहित अनेक अश्वमेध यज्ञ करने चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य अद्भुत दृश्यों से युक्त पुण्य लोकों को प्राप्त करता है। ॥11॥
 
The king should also perform many Ashwamedha sacrifices with sufficient dakshina. By doing so, a man attains the virtuous worlds full of wonderful sights. ॥ 11॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि यमगौतमसंवादे एकोनत्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १२९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें यम और गौतमका संवादविषयक एक सौ उनतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२९॥

 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas