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mahabharat 12.129.10: यमराज बोले - ब्रह्मन्! मनुष्य को तप करना चाहिए, बाहर-भीतर पवित्र रहना चाहिए तथा सत्यभाषण रूपी धर्म का पालन करने में सदैव तत्पर रहना चाहिए। यह सब करते हुए उसे प्रतिदिन अपने माता-पिता की सेवा और पूजा करनी चाहिए। 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.129: यम और गौतमका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 129: यम और गौतमका संवाद  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.129.10 
यम उवाच
तप:शौचवता नित्यं सत्यधर्मरतेन च।
मातापित्रोरहरह: पूजनं कार्यमञ्जसा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यमराज बोले - ब्रह्मन्! मनुष्य को तप करना चाहिए, बाहर-भीतर पवित्र रहना चाहिए तथा सत्यभाषण रूपी धर्म का पालन करने में सदैव तत्पर रहना चाहिए। यह सब करते हुए उसे प्रतिदिन अपने माता-पिता की सेवा और पूजा करनी चाहिए। 10॥
 
Yamraj said – Brahman! A person should do penance, remain pure inside and out and always be ready to follow religion in the form of truthful speech. While doing all this, he should serve and worship his parents daily. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)