Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.128.4-5: राजा! पूर्वकाल में उस राजा ने उस ऋषि का कभी अधिक आदर नहीं किया था। उसने उनकी आशाओं को चूर-चूर कर दिया था। इस कारण ऋषि ने निश्चय कर लिया था कि वे किसी राजा या अन्य जाति के लोगों द्वारा दिया गया दान कभी स्वीकार नहीं करेंगे और दीर्घकाल तक तपस्या करते रहे। | mahabharat अध्याय 12.128: तनु मुनिका राजा वीरद्युम्नको आशाके स्वरूपका परिचय देना और ऋषभके उपदेशसे सुमित्रका आशाको त्याग देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स हि तेन पुरा विप्रो राज्ञा नात्यर्थमानित:।
आशाकृतश्च राजेन्द्र तपो दीर्घं समाश्रित:॥ ४॥
प्रतिग्रहमहं राज्ञां न करिष्ये कथञ्चन।
अन्येषां चैव वर्णानामिति कृत्वा धियं तदा॥ ५॥
अनुवाद
राजा! पूर्वकाल में उस राजा ने उस ऋषि का कभी अधिक आदर नहीं किया था। उसने उनकी आशाओं को चूर-चूर कर दिया था। इस कारण ऋषि ने निश्चय कर लिया था कि वे किसी राजा या अन्य जाति के लोगों द्वारा दिया गया दान कभी स्वीकार नहीं करेंगे और दीर्घकाल तक तपस्या करते रहे।
King! In the past, that king had never respected that sage much. He had shattered their hopes. Due to this, the sage had resolved that he would never accept donations given by any king or people of other castes and had started performing penance for a long time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥