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mahabharat 12.128.3: ऋषभ कहते हैं - राजन ! राजा के ऐसा कहने पर ऋषि मुँह नीचे करके चुपचाप बैठे रहे । राजा को कोई उत्तर न दे सके ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.128: तनु मुनिका राजा वीरद्युम्नको आशाके स्वरूपका परिचय देना और ऋषभके उपदेशसे सुमित्रका आशाको त्याग देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 128: तनु मुनिका राजा वीरद्युम्नको आशाके स्वरूपका परिचय देना और ऋषभके उपदेशसे सुमित्रका आशाको त्याग देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.128.3 
ऋषभ उवाच
इत्येवमुक्ते वचने राज्ञा मुनिरधोमुख:।
तूष्णीमेवाभवत् तत्र न च प्रत्युक्तवान् नृपम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
ऋषभ कहते हैं - राजन ! राजा के ऐसा कहने पर ऋषि मुँह नीचे करके चुपचाप बैठे रहे । राजा को कोई उत्तर न दे सके ॥3॥
 
Rishabh says – Rajan! When the king said this, the sage remained sitting silently with his face down. Could not give any answer to the king. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)