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mahabharat 12.128.27: महाराज! ऐसी कठिन परिस्थिति में भी आप उचित प्रश्न पूछते हैं और उचित उत्तर सुनते हैं; अतः आपको इस बात से दुःख नहीं होना चाहिए कि दुर्योधन के साथ संधि नहीं हो सकी॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 12.128: तनु मुनिका राजा वीरद्युम्नको आशाके स्वरूपका परिचय देना और ऋषभके उपदेशसे सुमित्रका आशाको त्याग देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 128: तनु मुनिका राजा वीरद्युम्नको आशाके स्वरूपका परिचय देना और ऋषभके उपदेशसे सुमित्रका आशाको त्याग देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.128.27 
त्वं हि प्रष्टा च श्रोता च कृच्छ्रेष्वनुगतेष्विह।
श्रुत्वा मम महाराज न संतप्तुमिहार्हसि॥ २७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! ऐसी कठिन परिस्थिति में भी आप उचित प्रश्न पूछते हैं और उचित उत्तर सुनते हैं; अतः आपको इस बात से दुःख नहीं होना चाहिए कि दुर्योधन के साथ संधि नहीं हो सकी॥ 27॥
 
Maharaj! Even in such a difficult situation, you ask appropriate questions and hear appropriate answers; therefore, you should not be upset over the fact that a treaty could not be reached with Duryodhan.॥ 27॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि ऋषभगीतासु अष्टाविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें ऋषभगीताविषयक एक सौ अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)