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mahabharat 12.128.25: भीष्म कहते हैं - राजन्! महर्षि ऋषभदेव की यह बात सुनकर सुमित्र ने उस आशा को तुरंत त्याग दिया, जिससे उसका शरीर अत्यंत दुर्बल हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 12.128: तनु मुनिका राजा वीरद्युम्नको आशाके स्वरूपका परिचय देना और ऋषभके उपदेशसे सुमित्रका आशाको त्याग देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 128: तनु मुनिका राजा वीरद्युम्नको आशाके स्वरूपका परिचय देना और ऋषभके उपदेशसे सुमित्रका आशाको त्याग देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.128.25 
भीष्म उवाच
स तथोक्तस्तदा राजन् ऋषभेण महात्मना।
सुमित्रोऽपनयत् क्षिप्रमाशां कृशतरीं तत:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - राजन्! महर्षि ऋषभदेव की यह बात सुनकर सुमित्र ने उस आशा को तुरंत त्याग दिया, जिससे उसका शरीर अत्यंत दुर्बल हो रहा था।
 
Bhishma says - King! On hearing this from the great sage Rishabha, Sumitra immediately gave up that hope which was making his body very weak. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)