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mahabharat 12.128.18: जवानी की उम्र में शादी की बात सुनकर शादी की इच्छा रखने वाली लड़कियों के दिल में जो उम्मीद जगती है, वह मुझसे भी ज्यादा कमजोर है।   |   mahabharat अध्याय 12.128: तनु मुनिका राजा वीरद्युम्नको आशाके स्वरूपका परिचय देना और ऋषभके उपदेशसे सुमित्रका आशाको त्याग देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 128: तनु मुनिका राजा वीरद्युम्नको आशाके स्वरूपका परिचय देना और ऋषभके उपदेशसे सुमित्रका आशाको त्याग देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.128.18 
प्रदानकांक्षिणीनां च कन्यानां वयसि स्थिते।
श्रुत्वा कथास्तथायुक्ता: साऽऽशा कृशतरी मया॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जवानी की उम्र में शादी की बात सुनकर शादी की इच्छा रखने वाली लड़कियों के दिल में जो उम्मीद जगती है, वह मुझसे भी ज्यादा कमजोर है।
 
The hope that arises in the hearts of girls who wish to get married after hearing about marriage at the age of youth is even more feeble than me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)