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mahabharat 12.128.13: दुर्बल शरीर वाले ऋषि बोले, "पिताजी! जो धीरता रखता है, अर्थात् जो आवश्यकता होने पर भी किसी वस्तु की याचना नहीं करता, वह भिखारी दुर्लभ है। तथा जो भिक्षा मांगने वाले भिखारी की उपेक्षा नहीं करता, तथा आदरपूर्वक उसकी इच्छा पूरी करता है, वह मनुष्य संसार में बहुत दुर्लभ है।"   |   mahabharat अध्याय 12.128: तनु मुनिका राजा वीरद्युम्नको आशाके स्वरूपका परिचय देना और ऋषभके उपदेशसे सुमित्रका आशाको त्याग देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 128: तनु मुनिका राजा वीरद्युम्नको आशाके स्वरूपका परिचय देना और ऋषभके उपदेशसे सुमित्रका आशाको त्याग देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.128.13 
कृश उवाच
दुर्लभोऽप्यथवा नास्ति योऽर्थी धृतिमवाप्नुयात्।
स दुर्लभतरस्तात योऽर्थिनं नावमन्यते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
दुर्बल शरीर वाले ऋषि बोले, "पिताजी! जो धीरता रखता है, अर्थात् जो आवश्यकता होने पर भी किसी वस्तु की याचना नहीं करता, वह भिखारी दुर्लभ है। तथा जो भिक्षा मांगने वाले भिखारी की उपेक्षा नहीं करता, तथा आदरपूर्वक उसकी इच्छा पूरी करता है, वह मनुष्य संसार में बहुत दुर्लभ है।"
 
The feeble-bodied sage said, "Father! A beggar who can have patience, that is, who does not beg for anything despite needing it, is rare. And a man who does not ignore a beggar who is begging for something and respectfully fulfils his wish is very rare in the world." 13.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)