श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 127: ऋषभका राजा सुमित्रको वीरद्युम्न और तनु मुनिका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.127.26 
अपृच्छंश्चैव तं तत्र राजानमपराजितम्।
प्रयोजनमिदं सर्वमाश्रमस्य निवेशने॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वहां सभी ने अपराजित राजा से आश्रम में आने का उद्देश्य पूछा।
 
There they all asked the undefeated king the purpose of his visit to the hermitage.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि ऋषभगीतासु सप्तविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें ऋषभगीताविषयक एक सौ सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)