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mahabharat 12.127.22: महाराज! वह उनसे स्वर्ण कलश और छाल माँग रहा था। आपके पुत्र ने महर्षि की इच्छा की उपेक्षा की और उसे पूरा नहीं किया। इससे ब्राह्मण ऋषि बहुत दुःखी और निराश हो गए।   |   mahabharat अध्याय 12.127: ऋषभका राजा सुमित्रको वीरद्युम्न और तनु मुनिका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.127.22 
अर्थयन् कलशं राजन् काञ्चनं वल्कलानि च।
अवज्ञापूर्वकेनापि न सम्पादितवांस्तत:।
निर्विण्ण: स तु विप्रर्षिर्निराश: समपद्यत॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वह उनसे स्वर्ण कलश और छाल माँग रहा था। आपके पुत्र ने महर्षि की इच्छा की उपेक्षा की और उसे पूरा नहीं किया। इससे ब्राह्मण ऋषि बहुत दुःखी और निराश हो गए।
 
King! He was asking for a golden pot and bark from him. Your son ignored the Maharshi's wish and did not fulfill it. Due to this, the Brahmin sage became very sad and disappointed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)