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mahabharat 12.127.17: मेरे लिए उसे देखना कठिन है, फिर भी मेरे हृदय में उससे मिलने की बड़ी आशा है। उस आशा ने मेरे सम्पूर्ण शरीर को अपने घेरे में ले लिया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि मैं उसके लिए मृत्यु को भी स्वीकार करने को तैयार हूँ।॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.127: ऋषभका राजा सुमित्रको वीरद्युम्न और तनु मुनिका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 127: ऋषभका राजा सुमित्रको वीरद्युम्न और तनु मुनिका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.127.17 
दुर्लभ: स मया द्रष्टुमाशा च महती मम।
तया परीतगात्रोऽहं मुमूर्षुर्नात्र संशय:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
मेरे लिए उसे देखना कठिन है, फिर भी मेरे हृदय में उससे मिलने की बड़ी आशा है। उस आशा ने मेरे सम्पूर्ण शरीर को अपने घेरे में ले लिया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि मैं उसके लिए मृत्यु को भी स्वीकार करने को तैयार हूँ।॥17॥
 
‘It is difficult for me to see her, yet I have a great hope in my heart to meet her. That hope has taken over my entire body. There is no doubt that I am even willing to accept death for her.’॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)