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mahabharat 12.127.15: मैं अपने पुत्र को यहाँ अवश्य देखूँगा। मैं उसे यहाँ अवश्य देखूँगा। इसी आशा से पृथ्वी के राजा वीरद्युम्न उन दिनों उस वन में विचरण कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 12.127: ऋषभका राजा सुमित्रको वीरद्युम्न और तनु मुनिका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 127: ऋषभका राजा सुमित्रको वीरद्युम्न और तनु मुनिका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.127.15 
इह द्रक्ष्यामि तं पुत्रं द्रक्ष्यामीहेति पार्थिव:।
एवमाशाहृतो राजा चरन् वनमिदं पुरा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
मैं अपने पुत्र को यहाँ अवश्य देखूँगा। मैं उसे यहाँ अवश्य देखूँगा। इसी आशा से पृथ्वी के राजा वीरद्युम्न उन दिनों उस वन में विचरण कर रहे थे।
 
I will certainly see my son here. I will certainly see him here. With this hope, the king of the earth, Veerdyumna, was wandering in that forest in those days. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)