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mahabharat 12.127.10: मैं उस दुबले-पतले ब्राह्मण को देखकर भयभीत हो गया और मन में बहुत दुःखी हुआ; फिर मैंने उसके चरणों में प्रणाम किया और हाथ जोड़कर उसके सामने खड़ा हो गया।   |   mahabharat अध्याय 12.127: ऋषभका राजा सुमित्रको वीरद्युम्न और तनु मुनिका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 127: ऋषभका राजा सुमित्रको वीरद्युम्न और तनु मुनिका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.127.10 
दृष्ट्वाहं तं कृशं विप्रं भीत: परमदुर्मना:।
पादौ तस्याभिवाद्याथ स्थित: प्राञ्जलिरग्रत:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मैं उस दुबले-पतले ब्राह्मण को देखकर भयभीत हो गया और मन में बहुत दुःखी हुआ; फिर मैंने उसके चरणों में प्रणाम किया और हाथ जोड़कर उसके सामने खड़ा हो गया।
 
I was frightened on seeing that skinny Brahmin and became very sad in my heart; then I bowed down to his feet and stood before him with folded hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)