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mahabharat 12.126.10: उस दौड़ते हुए मृग का पीछा करते हुए मैं अचानक इस वन में आप लोगों के पास पहुँच गया हूँ। मेरा सारा वैभव नष्ट हो गया है। मैं उदास हो रहा हूँ और बड़े कष्ट से पीड़ित हूँ॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.126: राजा सुमित्रका मृगकी खोज करते हुए तपस्वी मुनियोंके आश्रमपर पहुँचना और उनसे आशाके विषयमें प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 126: राजा सुमित्रका मृगकी खोज करते हुए तपस्वी मुनियोंके आश्रमपर पहुँचना और उनसे आशाके विषयमें प्रश्न करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.126.10 
तं द्रवन्तमनुप्राप्तो वनमेतद् यदृच्छया।
भवत्सकाशं नष्टश्रीर्हताश: श्रमकर्शित:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उस दौड़ते हुए मृग का पीछा करते हुए मैं अचानक इस वन में आप लोगों के पास पहुँच गया हूँ। मेरा सारा वैभव नष्ट हो गया है। मैं उदास हो रहा हूँ और बड़े कष्ट से पीड़ित हूँ॥ 10॥
 
'Following that running deer I have suddenly reached near you people in this forest. All my glory has been destroyed. I am feeling dejected and am suffering from great hard work.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)