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mahabharat 12.125.15: यद्यपि राजा के अनेक बाण उसके शरीर में चुभ गए थे, फिर भी वन में विचरण करने वाला हिरण बार-बार उसके पास आता रहा, मानो खेल रहा हो।   |   mahabharat अध्याय 12.125: युधिष्ठिरका आशाविषयक प्रश्न—उत्तरमें राजा सुमित्र और ऋषभ नामक ऋषिके इतिहासका आरम्भ, उसमें राजा सुमित्रका एक मृगके पीछे दौड़ना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 125: युधिष्ठिरका आशाविषयक प्रश्न—उत्तरमें राजा सुमित्र और ऋषभ नामक ऋषिके इतिहासका आरम्भ, उसमें राजा सुमित्रका एक मृगके पीछे दौड़ना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.125.15 
स तस्य बाणैर्बहुभि: समभ्यस्तो वनेचर:।
प्रक्रीडन्निव राजेन्द्र पुनरभ्येति चान्तिकम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि राजा के अनेक बाण उसके शरीर में चुभ गए थे, फिर भी वन में विचरण करने वाला हिरण बार-बार उसके पास आता रहा, मानो खेल रहा हो।
 
Although many of the King's arrows had pierced his body, yet the forest-wandering deer kept coming near him again and again, as if playing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)