Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.125.1: युधिष्ठिर ने पूछा- पितामह! आपने कहा है कि मनुष्य में चरित्र सबसे महत्वपूर्ण गुण है। अब मैं जानना चाहता हूँ कि आशा की उत्पत्ति कैसे हुई? आशा क्या है? कृपया मुझे यह भी बताएँ॥ 1॥   |   mahabharat अध्याय 12.125: युधिष्ठिरका आशाविषयक प्रश्न—उत्तरमें राजा सुमित्र और ऋषभ नामक ऋषिके इतिहासका आरम्भ, उसमें राजा सुमित्रका एक मृगके पीछे दौड़ना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 125: युधिष्ठिरका आशाविषयक प्रश्न—उत्तरमें राजा सुमित्र और ऋषभ नामक ऋषिके इतिहासका आरम्भ, उसमें राजा सुमित्रका एक मृगके पीछे दौड़ना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.125.1 
युधिष्ठिर उवाच
शीलं प्रधानं पुरुषे कथितं ते पितामह।
कथं त्वाशा समुत्पन्ना या चाशा तद् वदस्व मे॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- पितामह! आपने कहा है कि मनुष्य में चरित्र सबसे महत्वपूर्ण गुण है। अब मैं जानना चाहता हूँ कि आशा की उत्पत्ति कैसे हुई? आशा क्या है? कृपया मुझे यह भी बताएँ॥ 1॥
 
Yudhishthira asked- Grandfather! You have said that character is the most important quality in a man. Now I want to know how hope came into being? What is hope? Please tell me this also.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)