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mahabharat 12.124.69: हे मनुष्यों के स्वामी! यद्यपि कभी-कभी चरित्रहीन मनुष्य लक्ष्मी को प्राप्त कर लेते हैं, तथापि वे अधिक समय तक उनका उपभोग नहीं कर पाते और उनका सर्वथा नाश हो जाता है ॥69॥   |   mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  12.124.69 
यद्यप्यशीला नृपते प्राप्नुवन्ति श्रियं क्वचित् ।
न भुञ्जते चिरं तात समूलाश्च न सन्ति ते॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! यद्यपि कभी-कभी चरित्रहीन मनुष्य लक्ष्मी को प्राप्त कर लेते हैं, तथापि वे अधिक समय तक उनका उपभोग नहीं कर पाते और उनका सर्वथा नाश हो जाता है ॥69॥
 
O Lord of men! Although sometimes men without character attain the goddess Lakshmi, yet they are unable to enjoy her for long and they perish completely. ॥ 69॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)