Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.124.63-64: भीष्म कहते हैं, 'युधिष्ठिर! ऐसा कहकर लक्ष्मी तथा शील आदि सभी गुण इंद्र के पास चले गए। यह वृत्तांत सुनकर दुर्योधन ने पुनः अपने पिता से कहा, 'कौरवपुत्र! मैं शील का सार जानना चाहता हूँ। कृपया मुझे शील प्राप्त करने का उपाय बताइए।' | mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म उवाच
एवमुक्त्वा गता श्रीस्तु ते च सर्वे युधिष्ठिर।
दुर्योधनस्तु पितरं भूय एवाब्रवीद् वच:॥ ६३॥
शीलस्य तत्त्वमिच्छामि वेत्तुं कौरवनन्दन।
प्राप्यते च यथा शीलं तं चोपायं वदस्व मे॥ ६४॥
अनुवाद
भीष्म कहते हैं, 'युधिष्ठिर! ऐसा कहकर लक्ष्मी तथा शील आदि सभी गुण इंद्र के पास चले गए। यह वृत्तांत सुनकर दुर्योधन ने पुनः अपने पिता से कहा, 'कौरवपुत्र! मैं शील का सार जानना चाहता हूँ। कृपया मुझे शील प्राप्त करने का उपाय बताइए।'
Bhishma says, 'Yudhishthira! Saying this, Lakshmi and all those virtues like morality went to Indra. On hearing this story, Duryodhan again said to his father, 'Son of Kauravas! I want to know the essence of morality. Please tell me the way to achieve morality.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥