Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.124.56-58h: मनुष्यों के स्वामी! ऐसा कहकर बल सद्चर के पीछे चला गया। तत्पश्चात् प्रह्लाद के शरीर से एक तेजस्वी देवी प्रकट हुई। दैत्यराज ने उससे पूछा- 'तुम कौन हो?' वह बोली- 'मैं लक्ष्मी हूँ। हे वीर एवं सत्यनिष्ठ योद्धा! मैं स्वयं तुम्हारे शरीर में आकर निवास करती थी, किन्तु अब तुमने मुझे त्याग दिया है; अतः मैं चली जाती हूँ; क्योंकि मैं बल की अनुचर हूँ।'॥ 56-57 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्यों के स्वामी! ऐसा कहकर बल सद्चर के पीछे चला गया। तत्पश्चात् प्रह्लाद के शरीर से एक तेजस्वी देवी प्रकट हुई। दैत्यराज ने उससे पूछा- 'तुम कौन हो?' वह बोली- 'मैं लक्ष्मी हूँ। हे वीर एवं सत्यनिष्ठ योद्धा! मैं स्वयं तुम्हारे शरीर में आकर निवास करती थी, किन्तु अब तुमने मुझे त्याग दिया है; अतः मैं चली जाती हूँ; क्योंकि मैं बल की अनुचर हूँ।'॥ 56-57 1/2॥
Lord of men! Saying this, Bal went after Sadchar. Thereafter, a radiant goddess appeared from Prahlad's body. The demon king asked her- 'Who are you?' She said- 'I am Lakshmi. O brave and truthful warrior! I myself came and resided in your body, but now you have abandoned me; therefore I will go away; because I am the follower of Bal.'॥ 56-57 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥