Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.124.49-51h: प्रभु! ऐसा कहकर वह आत्मा अंतर्धान हो गई और इंद्र के शरीर में प्रविष्ट हो गई। उस आत्मा के चले जाने पर प्रह्लाद के शरीर से वैसी ही एक और आत्मा प्रकट हुई। प्रह्लाद ने पूछा- 'तुम कौन हो?' उसने उत्तर दिया- 'प्रह्लाद! मुझे धर्म समझो। जहाँ वह श्रेष्ठ ब्राह्मण होगा, मैं वहाँ जाऊँगा। दैत्यराज! जहाँ आत्मा होती है, वहाँ मैं भी निवास करता हूँ।'॥49-50 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रभु! ऐसा कहकर वह आत्मा अंतर्धान हो गई और इंद्र के शरीर में प्रविष्ट हो गई। उस आत्मा के चले जाने पर प्रह्लाद के शरीर से वैसी ही एक और आत्मा प्रकट हुई। प्रह्लाद ने पूछा- 'तुम कौन हो?' उसने उत्तर दिया- 'प्रह्लाद! मुझे धर्म समझो। जहाँ वह श्रेष्ठ ब्राह्मण होगा, मैं वहाँ जाऊँगा। दैत्यराज! जहाँ आत्मा होती है, वहाँ मैं भी निवास करता हूँ।'॥49-50 1/2॥
Prabhu! Saying this, the spirit disappeared and entered the body of Indra. After that spirit left, another similar spirit appeared from Prahlad's body. Prahlad asked- 'Who are you?' He replied- 'Prahlad! Consider me as Dharma. I will go wherever that great Brahmin is. Demon King! Wherever there is spirit, I also live there.'॥ 49-50 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥