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श्लोक  12.124.47 
तमपृच्छन्महाकायं प्रह्राद: को भवानिति।
प्रत्याहतं तु शीलोऽस्मि त्यक्तो गच्छाम्यहं त्वया॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लाद ने उस विशालकाय व्यक्ति से पूछा, ‘तुम कौन हो?’ उसने उत्तर दिया, ‘मैं शील हूँ। तुमने मुझे त्याग दिया है, इसलिए मैं जा रहा हूँ।’
 
Prahlada asked the giant man, 'Who are you?' He replied, 'I am Sheel. You have abandoned me, so I am leaving.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)