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mahabharat 12.124.46: तात! जब वह चिन्ता कर रहा था, तब उसके शरीर से मूर्ति के रूप में एक अत्यन्त तेज छायामय ज्योति प्रकट हुई। उसने अपना शरीर त्याग दिया था। 46॥   |   mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.124.46 
तस्य चिन्तयतस्तावच्छायाभूतं महाद्युति।
तेजो विग्रहवत् तात शरीरमजहात् तदा॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
तात! जब वह चिन्ता कर रहा था, तब उसके शरीर से मूर्ति के रूप में एक अत्यन्त तेज छायामय ज्योति प्रकट हुई। उसने अपना शरीर त्याग दिया था। 46॥
 
Tat! While he was worrying, a very bright shadowy light appeared from his body in the form of a statue. He had abandoned his body. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)